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Election Commission : आचार संहिता लगने के तुरंत बाद चुनाव आयोग ने कई आईएएस-आईपीएस को जिलों से हटाया

रायपुर।  चुनाव आयोग ने आचार संहिता लगने के तुरंत बाद छत्तीसगढ़ के कई आईएएस-आईपीएस को कल जिलों से हटा दिया, और दूसरी कुर्सियों से भी। इसके पीछे भाजपा की शिकायत तो थी ही, परंतु बहुत से अफसरों के खिलाफ की गई थी !

रायगढ़ के कलेक्टर तारन प्रकाश सिन्हा को हटाने की दो वजहें लगती हैं, एक तो तारन प्रकाश सिन्हा मुख्यमंत्री के खुद के विभाग जनसंपर्क के अधिकारी रह चुके हैं, और वे मुख्यमंत्री सचिवालय में भी थे। वे लगातार दो जिलों में कलेक्टर रहे, और रायगढ़ जैसे महत्वपूर्ण जिले में उनकी तैनाती की वजह से मुख्यमंत्री के पसंदीदा अफसर दिखते हैं। ऐसे में जब एक भूतपूर्व आईएएस ओ. पी. चौधरी रायगढ़ से ही भाजपा उम्मीदवार बने, तो राजधानी रायपुर के कलेक्टर रह चुके चौधरी को चुनावों में कलेक्टरों की ताकत का अंदाज रहा होगा . और भाजपा की लिस्ट आने के बाद जल्द ही हटाए गए लोगों में तारन प्रकाश सिन्हा का नाम जुड़ गया।

 बिलासपुर के कलेक्टर संजीव झा (चुनाव आयोग के पत्र में गलती से नाम संजय झा लिखा है, लेकिन पदनाम सही लिखा है) को हटाने का कारण कोरबा का कलेक्टर रहना एक वजह है जहां पर वे कोयला घोटाला से लेकर डीएमएफ घोटाला तक कई तरह की ईडी-जांच के वक्त कलेक्टर थे। अब बिलासपुर जिले से भाजपा के कई दिग्गज चुनाव लड़ रहे हैं, और ऐसे में कोरबा- बिलासपुर कलेक्टर रखे गए अधिकारी को हटाना शायद ठीक समझा गया है।

इसी तरह राजनांदगांव के एसपी अभिषेक मीणा को हटाया गया है जो कि पहले कोरबा के एसपी रह चुके हैं, और उनके कार्यकाल के दौरान कोयला, डीएमएफ, और कई तरह की जांच ईडी कर रही है, और उन्हें लगातार महत्वपूर्ण जिलों में बनाए रखने की वजह से वे नजरों में आए हैं। इसके अलावा एक बड़ी वजह यह भी लगती है कि डॉ. रमन सिंह राजनांदगांव से चुनाव लड़ रहे हैं, और वहां के एसपी का मुख्यमंत्री का करीबी या विश्वासपात्र होना ठीक नहीं माना गया है। छत्तीसगढ़ का एक महत्वपूर्ण सीमावर्ती जिला होने की वजह से दूसरे राज्य से कई तरह की आवाजाही को लेकर इसे संवेदनशील जिला माना जाता है।

दुर्ग के एसपी शलभ कुमार सिन्हा को भी हटाया गया है, और दुर्ग के पाटन विधानसभा क्षेत्र से मुख्यमंत्री भूपेश बघेल भी शायद उम्मीदवार होंगे, और भाजपा के सांसद विजय बघेल तो वहां से उम्मीदवार हैं ही। इसके अलावा भी दुर्ग राजनीतिक रूप से बड़ा महत्वपूर्ण और संवेदनशील जिला है, और ऐसे में चुनाव के कुछ महीने पहले सरकार ने वहां छांटकर शलभ कुमार सिन्हा को एसपी बनाया था, और ऐसी पसंद ही शायद चुनाव आयोग को पसंद नहीं आई है।

Election Commission :   मार्कफेड, और विशेष सचिव खाद्य विभाग से हटाने के पीछे वजह यह है कि धान और चावल से जुड़े हुए इन दफ्तरों की जांच ईडी कर रही है, और ईडी के हाथ कई जानकारियां लगी हैं, अब उनके आधार पर चुनाव आयोग ने यह फैसला लिया दिखता है, क्योंकि भाजपा की शिकायतों में इस बात का भी जिक्र था। ईडी की जांच में इन दफ्तरों से व्यापारियों से कई तरह की वसूली की जांच चल रही है, और इस चुनाव में फिर ऐसा कुछ न हो, ऐसी शिकायतों पर शायद आयोग ने गौर किया है। यह भी माना जा रहा है कि मनोज सोनी के खिलाफ आयोग को जो बताया गया था कि वे आईएएस नहीं हैं, और इन पदों के पात्र नहीं हैं, उन पर भी कार्रवाई हुई है।

बिलासपुर के एडिशनल अभिषेक माहेश्वरी को हटाया गया है, वे कुछ समय पहले तक रायपुर के एडिशनल एसपी थे, और उसके पहले इंटेलीजेंस में। खैरागढ़ उपचुनाव के समय से भाजपा ने उनके खिलाफ राजनीतिक खुफिया काम करने के आरोप लगाए थे। बाद में जब महादेव ऐप के तहत पुलिस अफसरों को मोटी रकम देने की बात आई, तब भी ईडी ने अदालत को बताया था कि रायपुर और दुर्ग के एडिशनल एसपी को रकम हर महीने सट्टे के कारोबार से मिलते थे, और यह रकम चन्द्रभूषण वर्मा नाम का पुलिस कर्मचारी पहुंचाता था। अदालत में ऐसे आरोप के वक्त अभिषेक माहेश्वरी रायपुर के एडिशनल एसपी थे, और संजय ध्रुव दुर्ग के इन दोनों को ही हटाया गया है। इन दोनों के खिलाफ भाजपा की कई शिकायतें थीं, और ये दोनों आज भाजपा के बड़े नेताओं के इलाकों में पदस्थ भी थे। राज्य में ईडी की कार्रवाई के दौरान भी इनकी भूमिका को लेकर शिकायत की गई थी।हो सकता है कि इनके आधार पर यह कार्रवाई की गई हो।

कुल मिलाकर कुछ महत्वपूर्ण भाजपा उम्मीदवारों के इलाकों में पदस्थ अफसरों को हटाया गया है, और कुछ उन अफसरों को हटाया गया है जिनके खिलाफ ईडी की जांच में टिप्पणी की गई है, या जो जांच के घेरे में हैं। इस तरह चुनाव आचार संहिता लगते ही इतने ताकतवर, चुनिंदा, और महत्वपूर्ण जगहों पर बैठे हुए अफसरों को हटाने से बाकी अफसरों में एक सनसनी फैली हुई है।

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